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भारत में बच्चों के लिए सर्वोत्तम बुखार की दवा (Best Fever Medicine) | माता-पिता के लिए पूरी जानकारी

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शिशुओं और बच्चों में बुखार (Fever) होना एक सामान्य बात है और यह अक्सर संक्रमण के खिलाफ शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया होती है। बुखार (Fever) अपने आप में शरीर की रक्षा प्रणाली का हिस्सा है, लेकिन इसकी सही निगरानी और उचित देखभाल बहुत जरूरी होती है।

बच्चों के लिए सही बुखार की दवा का चुनाव केवल तापमान देखकर नहीं करना चाहिए, बल्कि बच्चे की उम्र, वजन और उसके संपूर्ण लक्षणों को ध्यान में रखकर करना चाहिए, ताकि उपचार सुरक्षित और प्रभावी हो सके।

इस ब्लॉग में हम बच्चों में बुखार के कारण, उसके इलाज और भारत में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाओं जैसे पैरासिटामोल और आइबुप्रोफेन के बारे में जानकारी देंगे, जिससे माता-पिता अपने शिशु, छोटे बच्चे और बड़े बच्चों के लिए सुरक्षित दवा चुन सकें।

बच्चों में बुखार (Fever) क्या होता है?

बुखार शरीर के तापमान में अस्थायी वृद्धि होती है, जो यह दर्शाती है कि शरीर किसी संक्रमण से लड़ रहा है। आमतौर पर बच्चों का सामान्य शरीर तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस से 37.5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, हालांकि दिन के समय और मापने की विधि के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है।

जब शरीर का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है, तो उसे बुखार माना जाता है। तीन महीने से कम उम्र के शिशुओं में हल्का बुखार भी गंभीर माना जाता है और डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है।

छोटे और बड़े बच्चे हल्के बुखार को अक्सर सहन कर लेते हैं, लेकिन बच्चे का व्यवहार, सक्रियता और अन्य लक्षण तापमान जितने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

बच्चों में बुखार (Fever) होने के सामान्य कारण

अधिकतर बच्चों में बुखार विषाणु या जीवाणु संक्रमण के कारण होता है, क्योंकि यह शरीर की कीटाणुओं से लड़ने की प्राकृतिक प्रक्रिया है। टीकाकरण के बाद, दांत निकलते समय या हल्की बीमारियों में भी बुखार हो सकता है, जो आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है।

  • विषाणु संक्रमण – सर्दी, जुकाम, फ्लू या पेट से संबंधित संक्रमण
  • जीवाणु संक्रमण – कान का संक्रमण, गले का संक्रमण या मूत्र संक्रमण
  • टीकाकरण के बाद बुखार – शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनने के दौरान हल्का और अस्थायी बुखार


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शिशुओं और बच्चों में बुखार (Fever) अलग क्यों होता है?

शिशुओं और बच्चों में बुखार (Fever) वयस्कों की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती है।

बढ़ते बच्चे रोजमर्रा की जिंदगी में नए-नए कीटाणुओं के संपर्क में आते हैं और बुखार (Fever) शरीर की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का तरीका होता है। इसके अलावा, उनकी स्वच्छता की आदतें भी धीरे-धीरे विकसित होती हैं।

उम्र के अनुसार सामान्य शरीर तापमान सीमा

बच्चों का सामान्य शरीर तापमान आमतौर पर 36.5 डिग्री सेल्सियस से 37.5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, हालांकि दिन के समय इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है। शिशुओं में हल्का बुखार (Fever) भी ध्यान देने योग्य होता है, जबकि बड़े बच्चे हल्की बढ़ोतरी को बेहतर तरीके से सहन कर लेते हैं।

  • शिशु और छोटे बच्चे: सामान्यतः 36.5 डिग्री सेल्सियस से 37.5 डिग्री सेल्सियस; हल्का बुखार भी ध्यान मांगता है
  • बड़े बच्चे: समान सीमा, लेकिन हल्के बुखार को बेहतर ढंग से सहन कर लेते हैं


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क्या बच्चों के लिए बुखार (Fever) खतरनाक होता है?

हर बुखार हानिकारक नहीं होता। हल्का से मध्यम बुखार आमतौर पर शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करता है, जबकि तेज बुखार पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है।

कई माता-पिता सोचते हैं कि हर बुखार नुकसानदायक होता है, लेकिन यह धारणा कि “बुखार से हमेशा दिमाग को नुकसान होता है” बिल्कुल गलत है। असली महत्व बच्चे की हालत का होता है, न कि केवल तापमान का।

बच्चे को बुखार की दवा कब देनी चाहिए?

केवल थर्मामीटर में ज्यादा तापमान दिखने पर ही दवा देना जरूरी नहीं होता। इलाज का मुख्य उद्देश्य बच्चे को आराम देना होता है, न कि केवल तापमान को सामान्य करना।

  • अगर बच्चा बेचैन हो, चिड़चिड़ा हो, दर्द में हो, ठीक से सो न पा रहा हो या तरल पदार्थ पीने से मना कर रहा हो, तो दवा दी जा सकती है।
  • अगर बुखार के साथ शरीर में दर्द, सिरदर्द या गले में खराश हो, तो बच्चों की बुखार की दवा से राहत मिल सकती है।

बच्चों के लिए कौन-सी बुखार की दवाएं सुरक्षित हैं?

बच्चों में बुखार के इलाज के लिए केवल कुछ ही दवाएं सुरक्षित और उपयुक्त मानी जाती हैं।

दवा

कब उपयोग करें

उम्र वर्ग

मुख्य सुरक्षा बिंदु

पैरासिटामोल (एसीटामिनोफेन)

बुखार (Fever) कम करने और हल्के से मध्यम दर्द में राहत देने के लिए।

अधिकतर उम्र के शिशु और बच्चे (सही मात्रा में)

पेट के लिए हल्की; वजन के अनुसार सही मात्रा देने पर सुरक्षित

आइबुप्रोफेन

बुखार (Fever) के साथ दर्द, सूजन, गले में खराश, कान दर्द या शरीर दर्द में

आमतौर पर 6 महीने से अधिक उम्र के बच्चों के लिए

यदि बच्चा निर्जलित हो, बार-बार उल्टी करता हो, पेट में घाव, गुर्दे की समस्या हो या डॉक्टर ने मना किया हो, तो इसका उपयोग न करें

महत्वपूर्ण सूचना: बुखार होने पर बच्चों या किशोरों को कभी भी एस्पिरिन नहीं देनी चाहिए। इसका संबंध रेय सिंड्रोम नामक एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी से होता है, जो यकृत और मस्तिष्क को प्रभावित करती है। हमेशा बच्चों के लिए विशेष रूप से बनी दवाओं का ही उपयोग करें और मात्रा संबंधी निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करें।

बच्चों के लिए उम्र के अनुसार बुखार की दवा मार्गदर्शिका

बच्चों में बुखार (Fever) का इलाज करते समय विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है, क्योंकि उम्र के अनुसार दवाओं की सुरक्षा और मात्रा बदलती रहती है। माता-पिता के लिए नीचे एक सरल मार्गदर्शिका दी गई है:

उम्र वर्ग

दिशानिर्देश

नवजात शिशु (0–3 महीने)

बुखार होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न दें।

शिशु (3–6 महीने)

केवल डॉक्टर की सलाह से दवा दें। पैरासिटामोल ड्रॉप या सिरप की सलाह दी जा सकती है। आमतौर पर आइबुप्रोफेन से बचा जाता है, जब तक डॉक्टर न कहें।

शिशु (6–12 महीने)

आमतौर पर पैरासिटामोल दिया जाता है। 6 महीने से अधिक उम्र के स्वस्थ शिशुओं में आइबुप्रोफेन दिया जा सकता है। हमेशा सही माप उपकरण का उपयोग करें।

छोटे बच्चे (1–3 वर्ष)

सही मात्रा में पैरासिटामोल और आइबुप्रोफेन सुरक्षित होते हैं। उम्र के अनुमान से या बार-बार दवा देने से बचें।

बच्चे (4–12 वर्ष)

जो बच्चे गोली नहीं निगल सकते, उनके लिए सिरप उपयुक्त होता है। बड़े बच्चों के लिए गोली डॉक्टर की सलाह से दी जानी चाहिए।

बच्चों के लिए बुखार की दवा की सही मात्रा – माता-पिता को क्या जानना चाहिए

बच्चों में बुखार (Fever) माता-पिता के लिए चिंता का कारण बन सकता है, लेकिन उम्र और वजन के अनुसार सही दवा और सही मात्रा जानना बहुत जरूरी है, ताकि अधिक मात्रा या दुष्प्रभावों से बचा जा सके।

उम्र वर्ग

पैरासिटामोल

आइबुप्रोफेन

0–3 महीने

केवल डॉक्टर की सलाह पर

अनुशंसित नहीं

3–6 महीने

प्रति खुराक 10–15 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम वजन, हर 4–6 घंटे में

आमतौर पर डॉक्टर की सलाह के बिना न दें

6–12 महीने

प्रति खुराक 10–15 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम, हर 4–6 घंटे में

प्रति खुराक 5–10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम, हर 6–8 घंटे में (यदि शरीर में पानी की कमी न हो)

1–3 वर्ष

प्रति खुराक 10–15 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम, हर 4–6 घंटे में

प्रति खुराक 5–10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम, हर 6–8 घंटे में

4–12 वर्ष

प्रति खुराक 10–15 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम, हर 4–6 घंटे में

प्रति खुराक 5–10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम, हर 6–8 घंटे में

महत्वपूर्ण: ऊपर दी गई मात्रा सामान्य जानकारी के लिए है। हमेशा डॉक्टर की सलाह या दवा के लेबल के अनुसार ही दवा दें, क्योंकि हर बच्चे की जरूरत अलग हो सकती है।

जी लैब फार्मेसी से बच्चों के लिए सर्वोत्तम बुखार (Fever) की दवाएं

जी लैब फार्मेसी की डब्ल्यूएचओ-जीएमपी प्रमाणित दवाएं बच्चों के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद और किफायती उपचार प्रदान करती हैं, जो पूरे परिवार के स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त हैं।

Parazex XT Syrup

Parazex XT Syrup 60 मिली एक बच्चों के अनुकूल बुखार (Fever) और दर्द निवारक सिरप है, जिसमें पैरासिटामोल होता है। यह बच्चों में तेज बुखार और हल्के दर्द को सुरक्षित रूप से कम करने में मदद करता है।

  • संयोजन: Paracetamol (250mg/5ml)
  • कार्य विधि: यह बुखार और दर्द पैदा करने वाले रसायनों को रोकता है, जिससे बच्चे को आराम मिलता है।
  • उपयुक्त: शिशु और बच्चे

Parazex Pediatric Oral Suspension

Parazex एक बच्चों के लिए बना पैरासिटामोल युक्त मौखिक निलंबन है, जो बुखार और हल्के से मध्यम दर्द को कम करने में मदद करता है और बच्चों को आराम प्रदान करता है।

  • संयोजन: Paracetamol (125mg)
  • कार्य विधि: यह बुखार और दर्द उत्पन्न करने वाले रसायनों को रोकता है।
  • उपयुक्त: 3 महीने से अधिक उम्र के शिशु और बच्चे

Ibuprol Plus Oral Suspension

यह पैरासिटामोल और आइबुप्रोफेन युक्त बच्चों की बुखार की दवा है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार प्रमाणित है और सिरप के रूप में आसानी से दी जा सकती है।

  • संयोजन: Ibuprofen (100mg) + Paracetamol (125mg)
  • कार्य विधि: यह बुखार और दर्द पैदा करने वाले तत्वों को रोककर प्रभावी राहत देता है।
  • उपयुक्त: 6 महीने से अधिक उम्र के बच्चे

सिरप बनाम गोली – बच्चों के बुखार (Fever) के लिए क्या बेहतर है?

बच्चों के बुखार के इलाज में सिरप या गोली का चुनाव करते समय बच्चे की उम्र, निगलने की क्षमता, सही मात्रा और देने में आसानी जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी होता है।

सिरप (तरल)

गोली (चबाने योग्य सहित)

शिशुओं, छोटे बच्चों और कम उम्र के बच्चों के लिए

उन बड़े बच्चों के लिए जो सुरक्षित रूप से निगल सकते हैं

निगलने में आसान

छोटे बच्चों के लिए कठिन हो सकता है

ड्रॉपर या कप से वजन के अनुसार सही मात्रा दी जा सकती है

निश्चित मात्रा; कभी-कभी आधा करना पड़ता है (केवल डॉक्टर की सलाह पर)

अक्सर बच्चों के स्वाद के अनुसार बनाया जाता है

कुछ गोलियां कड़वी हो सकती हैं; चबाने वाली गोलियां स्वादयुक्त होती हैं

घर में उपयोग के लिए उपयुक्त, लेकिन ले जाना थोड़ा कठिन

स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए आसानी से ले जाई जा सकती हैं

जब बच्चा गोली निगलने में सक्षम न हो

जब बच्चा आसानी से गोली निगल सके या डॉक्टर द्वारा अधिक मात्रा की सलाह दी गई हो

बच्चों को बुखार (Fever) की दवा कितनी बार दी जा सकती है?

बच्चों को बुखार की दवा कितनी बार देनी चाहिए, यह जानना सुरक्षित इलाज के लिए बहुत जरूरी है। दवा देने का अंतर बच्चे की उम्र, वजन और दी जा रही दवा पर निर्भर करता है। बहुत जल्दी-जल्दी दवा देने से दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ सकता है।

  • खुराक के बीच न्यूनतम अंतर: पैरासिटामोल आमतौर पर हर 4–6 घंटे में और आइबुप्रोफेन हर 6–8 घंटे में दी जाती है, जैसा डॉक्टर या लेबल पर लिखा हो।
  • बिना सलाह दवाएं न मिलाएं: पैरासिटामोल और आइबुप्रोफेन को बारी-बारी से देना भ्रम और अधिक मात्रा के खतरे को बढ़ा सकता है।
  • अगर बुखार जल्दी लौट आए: उसी खुराक को दोबारा न दें। बच्चे को आराम दें और जरूरत होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
  • खाली पेट या भोजन के साथ: पैरासिटामोल भोजन के साथ या बिना दिया जा सकता है। आइबुप्रोफेन भोजन के बाद देना बेहतर होता है, ताकि पेट में जलन न हो।

 

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अगर बच्चे का बुखार कम न हो तो क्या करें?

अगर दवा देने के बाद तुरंत बुखार कम न हो, तो घबराएं नहीं। बुखार कम करने वाली दवाओं को असर दिखाने में लगभग 30 से 60 मिनट लग सकते हैं। संक्रमण से लड़ते समय तापमान दोबारा बढ़ भी सकता है।

लेकिन यदि बुखार 2–3 दिन से अधिक रहे, बच्चा बहुत सुस्त हो जाए, सांस लेने में परेशानी हो, लगातार उल्टी करे, झटके आएं या शरीर पर चकत्ते हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

कभी भी दवा की मात्रा अपने आप न बढ़ाएं और न ही बार-बार दवा दें, क्योंकि इससे नुकसान हो सकता है।

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कौन-सी बुखार की दवाएं बच्चों को नहीं देनी चाहिए?

हर बुखार की दवा बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं होती। गलत दवा देने से नुकसान हो सकता है, भले ही वह वयस्कों के लिए प्रभावी हो।

  • वयस्कों की दवाएं बच्चों को कभी न दें, क्योंकि इनमें अधिक मात्रा या हानिकारक तत्व हो सकते हैं।
  • बिना पर्ची के एंटीबायोटिक देने से बचें, क्योंकि अधिकतर बुखार विषाणु संक्रमण से होते हैं और इनमें एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती।
  • एक साथ कई दवाएं देना बिना डॉक्टर की सलाह के खतरनाक हो सकता है और अधिक मात्रा का कारण बन सकता है।
  • घर में रखी पुरानी बची हुई दवाएं न दें, क्योंकि वे एक्सपायर हो सकती हैं या बच्चे की उम्र और वजन के अनुसार उपयुक्त नहीं होतीं।

यदि कोई संदेह हो, तो दवा देने से पहले हमेशा स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

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बच्चों के बुखार से उबरने में घरेलू देखभाल के उपाय

  • बच्चे को बार-बार पानी, मां का दूध, दूध या ओआरएस पिलाएं, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
  • हल्के और आरामदायक कपड़े पहनाएं और कमरे का तापमान संतुलित रखें।
  • पर्याप्त आराम और शांत गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।
  • भूख लगे तो हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन दें।
  • हल्के गुनगुने पानी से शरीर पोंछें, ठंडा या बर्फ वाला पानी न उपयोग करें।
  • पेशाब की मात्रा, गतिविधि स्तर और सतर्कता पर नजर रखें।
  • बच्चे को अतिरिक्त प्यार और भरोसा दें, क्योंकि बुखार में वे चिड़चिड़े हो सकते हैं।

बच्चे को बुखार (Fever) होने पर डॉक्टर को कब दिखाएं?

अधिकतर मामलों में बुखार घरेलू देखभाल से ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ स्थितियों में तुरंत चिकित्सकीय सहायता जरूरी होती है। यदि बच्चा बहुत बीमार दिखे, तो देर न करें। नीचे दिए गए लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं:

  • 3 महीने से कम उम्र के शिशु में बुखार
  • 2–3 दिन से अधिक समय तक बुखार रहना
  • सांस लेने में कठिनाई या बहुत तेज सांस लेना
  • लगातार उल्टी होना या तरल पदार्थ न पीना
  • अत्यधिक सुस्ती, भ्रम या जगाने में परेशानी
  • कभी भी झटके आना
  • ऐसे चकत्ते जो दबाने पर न मिटें
  • निर्जलीकरण के लक्षण (बहुत कम पेशाब, सूखा मुंह, आंसू न आना)

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निष्कर्ष:

जब माता-पिता यह समझ लेते हैं कि क्या सुरक्षित है और कब डॉक्टर की जरूरत होती है, तो बच्चों में बुखार का प्रबंधन आसान हो जाता है। अधिकतर बुखार शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। ध्यान आराम, पर्याप्त तरल और सही मात्रा पर होना चाहिए।

सही तरीके से दी गई पैरासिटामोल बच्चों में बुखार के लिए सामान्य रूप से उपयोग की जाती है, जबकि बड़ी उम्र के बच्चों में डॉक्टर की सलाह से गोली भी दी जा सकती है।

याद रखें, हर स्थिति के लिए एक ही दवा सबसे अच्छी नहीं होती। नवजात शिशु को बुखार की दवा केवल डॉक्टर की सलाह से ही देनी चाहिए। संदेह होने पर हमेशा चिकित्सक से संपर्क करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ's):

प्रश्न. बच्चों में बुखार किस तापमान पर माना जाता है?
उत्तर. जब शरीर का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो, तो उसे बुखार माना जाता है। केवल थर्मामीटर नहीं, बच्चे के व्यवहार पर भी ध्यान दें।

प्रश्न. बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित बुखार (Fever) की दवा कौन-सी है?
उत्तर. सही मात्रा में दी गई पैरासिटामोल बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है और पेट पर भी हल्की होती है।

प्रश्न. क्या शिशुओं के लिए आइबुप्रोफेन सुरक्षित है?
उत्तर. 6 महीने से अधिक उम्र के स्वस्थ और पर्याप्त पानी पीने वाले शिशुओं में यह सुरक्षित हो सकती है। छोटे शिशुओं में बिना डॉक्टर की सलाह न दें।

प्रश्न. क्या बुखार (Fever) की दवा देने के लिए बच्चे को जगाना चाहिए?
उत्तर. यदि बच्चा आराम से सो रहा है, तो उसे जगाने की जरूरत नहीं होती। आराम ठीक होने में मदद करता है।

प्रश्न. क्या बच्चों को बुखार (Fever) में एंटीबायोटिक की जरूरत होती है?
उत्तर. अधिकतर मामलों में नहीं, क्योंकि बुखार विषाणु संक्रमण से होता है। एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लें।

प्रश्न. अगर बच्चा दवा लेने के बाद उल्टी कर दे तो क्या करें?
उत्तर. यदि 15 मिनट के अंदर उल्टी हो जाए, तो दवा का असर नहीं हुआ होगा। दोबारा देने से पहले डॉक्टर से संपर्क करें।

प्रश्न. बुखार की दवा कितनी देर में असर करती है?
उत्तर. आमतौर पर 30 से 60 मिनट में असर शुरू हो जाता है और बच्चा आराम महसूस करने लगता है।

प्रश्न. क्या वयस्कों की गोली कम मात्रा में बच्चों को दी जा सकती है?
उत्तर. नहीं, बिना डॉक्टर की सलाह के वयस्कों की दवा बच्चों को न दें।

प्रश्न. क्या खाली पेट बच्चों को बुखार की दवा दी जा सकती है?
उत्तर. पैरासिटामोल भोजन के साथ या बिना दी जा सकती है, लेकिन आइबुप्रोफेन दूध या भोजन के बाद देना बेहतर होता है।

प्रश्न. बिना दवा के बच्चों का बुखार कैसे कम करें?
उत्तर. बच्चे को पर्याप्त पानी पिलाएं, हल्के कपड़े पहनाएं, आराम करवाएं और जरूरत पड़ने पर गुनगुने पानी से पोंछें। लक्षण बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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